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भाग 1: रास्ते की जंग

शहर की भागदौड़ वाली सुबह। नताशा रॉय अपनी स्कूटी पर सवार, अपने बालों को हवा में लहराते हुए कॉलेज की ओर जा रही थी। उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी, और होठों पर एक गुनगुनाहट। वह उन लड़कियों में से थी जो खामोश बैठ ही नहीं सकती थी। रास्ते में उसे जो भी दिखता दुकानदार, कोई दोस्त या राहगीर वह सबसे बात करना या हँसकर हाथ हिलाना नहीं भूलती थी।

नताशा का ध्यान फिलहाल एक छोटी सी मिठाई की दुकान पर था, जहाँ से ताजी कचौरियों की महक आ रही थी। "बस, पांच मिनट," उसने खुद से कहा, और अचानक ब्रेक लगाकर स्कूटी किनारे लगा दी।

दूसरी ओर, शहर की सबसे महंगी, काले रंग की विंटेज रोल्स-रॉयस सड़क पर पूरी शान से दौड़ रही थी। रुद्रांश सिंघानिया ड्राइवर की सीट पर था, खुद कार ड्राइव कर रहा था। उसके चेहरे पर एक सख्त पत्थर जैसी लकीर थी। आज उसे एक बहुत जरूरी बिजनेस मीटिंग के लिए जल्दी निकलना था, और फिर कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर पहला दिन था। उसे फालतू की देरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं थी।

तभी, अचानक एक स्कूटी वाली लड़की, नताशा, बिना पीछे देखे सड़क के बीचों-बीच स्कूटी घुमाकर वापस मुड़ने लगी।

रुद्रांश की आँखें गुस्से से लाल हो गईं। उसने ज़ोर से ब्रेक मारा। टायर सड़क पर घिसटते हुए चीखे। नताशा की स्कूटी बाल-बाल बची। नताशा डर के मारे कांप गई, लेकिन उसका स्वभाव उसे चुप नहीं बैठने दे सकता था।

उसने स्कूटी से उतरते हुए अपना हेलमेट उतारा और रुद्रांश की गाड़ी के पास पहुँची। रुद्रांश ने खिड़की का शीशा नीचे किया। नताशा ने अपना हाथ कमर पर रखा और चिल्लाई, "अंधे हो क्या? स्कूटी नहीं दिख रही थी क्या? इतनी महंगी गाड़ी ले ली है, लेकिन गाड़ी चलानी नहीं सीखी!"

रुद्रांश ने एक पल के लिए अपनी ठंडी, तीखी निगाहें नताशा पर डालीं। वह कुछ नहीं बोला, उसकी बस एक नज़र ही नताशा को अंदर तक भेद गई। उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, बस एक गहरी नफरत और चिढ़ थी।

"मैं बात कर रही हूँ आपसे! क्या गूँगे हो?" नताशा ने फिर से कहा, उसकी आवाज़ में गुस्सा था।

रुद्रांश ने धीरे से दरवाज़ा खोला और बाहर निकला। वह लंबा, चौड़ा और बेहद खतरनाक लग रहा था। उसने एक कदम नताशा की ओर बढ़ाया। वह इतना करीब आ गया कि नताशा को उसकी इत्र की खुशबू और उसकी गरमाहट महसूस होने लगी।

"तुमने," रुद्रांश ने बहुत धीमी, भारी आवाज़ में कहा, "अभी अपनी ज़िन्दगी के सबसे गलत इंसान से पंगा लिया है। अपनी जुबान को काबू में रखना सीखो, वरना मैं इसे बंद करना अच्छी तरह जानता हूँ।"

नताशा एक पल के लिए सहम गई, लेकिन फिर उसने अपनी ठुड्डी ऊपर उठाई। "धमकी मत दीजिए मुझे! ग़लती आपकी थी, और आप मुझे ही डरा रहे हैं? आप जैसे लोग बस पैसा दिखाकर सोचते हैं कि सब कुछ खरीद लेंगे।"

रुद्रांश ने एक ठंडी मुस्कान दी। उसने अपना हाथ जेब में डाला और बस उसकी आँखों में देखा। नताशा को पहली बार ऐसा लगा कि कोई इंसान अपनी आँखों से भी उसे चुप करा सकता है। वह बिना कुछ कहे अपनी गाड़ी में वापस बैठा और तेज़ी से आगे बढ़ गया।

नताशा ने पीछे मुड़कर देखा। उसका दिल तेज़ धड़क रहा था। "कौन था ये पागल? खडूस कहीं का!" उसने बड़बड़ाते हुए अपनी स्कूटी उठाई और कॉलेज की तरफ निकल पड़ी। उसे नहीं पता था कि आज उसका सामना फिर से उसी 'खडूस' से होने वाला था।

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