कार के डैशबोर्ड पर रखा विवान का मोबाइल फोन पूरी ताकत से बज रहा था 'ट्रिंग... ट्रिंग...'। स्क्रीन पर साफ़ अक्षरों में "तन्वी" का नाम चमक रहा था। खिड़कियों पर बाहर मूसलाधार बारिश और अंदर की गर्मी की वजह से गहरी सफेद धुंध जमी हुई थी, जिस पर अहाना की हथेलियों और उंगलियों के निशान अभी-अभी के मिलन की गवाही दे रहे थे। अहाना विवान के नीचे लेटी हुई थी, उसका सूट उसकी छाती तक उठा हुआ था और उसके दोनों स्तन पसीने से गीले होकर चमक रहे थे। उसकी जांघों के बीच अब भी विवान के कड़क लिंग pe*** का गर्म रस बह रहा था।
"विवान जी... तन्वी... तन्वी का फोन है! उठिए प्लीज, भगवान के लिए फोन उठाइए वरना वह शक कर लेगी!" अहाना ने हांफते हुए, कांपती आवाज में फुसफुसाया। उसका चेहरा डर के मारे सफेद पड़ चुका था और उसकी छाती इतनी तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी मानो उसका दम घुट जाएगा।







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