सुबह की पहली पीली किरण गलियारे की खिड़की से छनकर फर्श पर आ रही थी। अहाना का पूरा वजूद इस समय बुरी तरह कांप रहा था। वह विवान के कमरे से अभी-अभी निकली थी, उसका बदन विवान की रात भर की कड़क छुअन और उनके वीर्य की महक से सुलग रहा था। उसने जैसे ही अपने कमरे की तरफ कदम बढ़ाए, उसकी निगाह तन्वी के कमरे के आधे खुले दरवाजे पर थमी।







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