तन्वी रसोई के भीतर जाकर पानी का गिलास उठाने लगी, और बाहर लिविंग रूम में अहाना का पूरा बदन कांप रहा था। वह जड़ सी खड़ी थी। उसकी सांसें इतनी तेज़ थीं कि छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। उसने डरी हुई नज़रों से सोफे पर बैठे विवान को देखा, जिन्होंने अखबार अपने चेहरे के सामने अटका रखा था।







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