जैसे ही विवान की बाम से सनी गर्म उँगलियों ने अहाना के सूजे हुए टखने की मखमली त्वचा को छुआ, कमरे का तापमान एक झटके में बढ़ गया। पुदीने और नीलगिरी की तीखी, सुलगती हुई गंध विवान के कड़क मर्दाना परफ्यूम के साथ मिलकर हवा में तैर रही थी। अहाना की आँखें कसकर बंद हो गईं और उसके होंठों से एक बेहद धीमी, कांपती हुई आह निकली।
"उूंह... विवान..."







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