विवान के पीछे चलते हुए अहाना के कदम जैसे सीमेंट के भारी ब्लाकों में तब्दील हो चुके थे। पोर्टिको में खड़ी विवान की चमचमाती काले रंग की लग्जरी एसयूवी की बैक सीट पर बैठते ही अहाना ने अपनी सांसों को काबू करने की कोशिश की। पूरा रास्ता बेहद खामोश रहा, सिर्फ तन्वी की चहचाहट और विवान के आईपैड पर आने वाले ऑफिशियल मेल्स की आवाज ही उस भारी सन्नाटे को तोड़ पा रही थी। विवान ने रियर-व्यू मिरर से कई बार अहाना की झुकी हुई पलकों और उसकी सुराहीदार गर्दन के पिछले हिस्से को निहारा था, जिससे अहाना का मैरून अनारकली सूट उसके भीतर के पसीने से और चिपक गया था।
कॉलेज पहुँचकर ओरिएंटेशन का पूरा दिन बेहद थकाऊ और लंबा साबित हुआ। फॉर्मेलिटीज, लंबे भाषण और नए चेहरों के बीच अहाना का शरीर तो मौजूद था, पर उसकी रूह और उसका दिमाग डाइनिंग टेबल की उस गर्म फुसफुसाहट में ही अटका रहा।







Write a comment ...