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भाग 6: तुम्हारी सांसों की गर्माहट

अँधेरी रसोई के फर्श पर जमी पानी की कुछ ठंडी बूंदें अहाना के नंगे पैरों की त्वचा को छू रही थीं। उसकी जांघें अभी भी बेकाबू होकर थरथरा रही थीं। काले सैटिन नाइटगाउन का महीन, रेशमी कपड़ा उसकी कमर के पास बुरी तरह सिकुड़ा हुआ था, जिसे विवान की भारी हथेलियों ने कुछ ही पलों पहले बेहद बेरहमी और दीवानगी से भींचा था। उसकी छाती हवा के लिए बेताब होकर तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी, जिससे उसके कड़े स्तनों का उभार नाइटगाउन के पतले गले से बाहर छलकने को आतुर दिख रहा था।

"उफ्फ... मैं क्या कर रही हूँ? यह सब क्या हो रहा है मेरे साथ?" उसने अपने कांपते हुए दोनों हाथों को अपने चेहरे पर दबा लिया। उसकी उंगलियों में अब भी विवान के जिस्म की वही मादक, मर्दाना खुशबू रची-बसी थी, जो किसी तीखे नशे की तरह उसके फेफड़ों में उतर रही थी।

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