दोपहर के ढलते ही आसमान में काले, घने बादलों का डेरा जमने लगा था। हवा में एक अजीब सी भारी उमस थी, जो बदन को चिपचिपा बना रही थी। अहाना और तन्वी ऑटो से उतरकर जैसे ही आलीशान बंगले के मुख्य गेट के भीतर दाखिल हुईं, अहाना के चेहरे पर थकान और बेचैनी की साफ़ लकीरें खिंच चुकी थीं। पूरा दिन कॉलेज के कैंपस में फॉर्मेलिटीज़ पूरी करने में निकल गया था, लेकिन अहाना के दिमाग के किसी कोने में डाइनिंग टेबल पर हुआ वह स्पर्श अब भी सुलग रहा था। उसकी तंग जींस उसकी जांघों पर चिपक रही थी, जिससे उसके गोरे बदन में एक अजीब सी खुजली और गर्माहट महसूस हो रही थी।
"उफ्फ! कितनी भयानक गर्मी और उमस है आज," तन्वी ने अपने गले से दुपट्टा हटाकर सोफे पर फेंकते हुए कहा। "मेरा तो पूरा बदन पसीने से नहा गया है। अहाना, तू ठीक तो है ना? पूरा रास्ता तू बस खामोश रही।"







Write a comment ...