अहाना हाँफती हुई, अपनी छाती पर दोनों हाथ टिकाए सीढ़ियों से नीचे की तरफ भागी। उसकी सुराहीदार गर्दन पर अब भी पसीने की बूंदें चमक रही थीं और उसका दिल पसलियों को तोड़कर बाहर आने को बेताब था। विवान की वह आखिरी सुलगती हुई नजर और उसकी भारी, रसीली आवाज उसके पूरे बदन में एक सिहरन बनकर दौड़ रही थी। उसे इस तरह बदहवास हालत में नीचे आते देख तन्वी ने हाथ में पकड़ा मैंगो शेक का ग्लास टेबल पर रखा और चौंककर उसकी तरफ बढ़ी।
"अरे! अहाना, क्या हुआ तुझे? तू ऐसे क्यों हाँफ रही है जैसे पीछे कोई भूत पड़ा हो?" तन्वी ने अहाना के दोनों कांपते हुए कंधों को पकड़ते हुए पूछा।







Write a comment ...