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भाग 1: नया घर, पुरानी सहेली और वो

शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भारी भीड़, शोर-शराबे और इंजनों से निकलते गर्म धुएं के बीच अहाना अपने भारी-भरकम सूटकेस को थामे खड़ी थी। हवा में एक अजीब सी उमस थी जो उसके गोरे गालों पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें बनकर उभर रही थी। उसके दिल की धड़कनें तेज थीं। आज वह अपने छोटे से शांत शहर को छोड़कर इस विशाल, अजनबी महानगर में अपनी आगे की कॉलेज की पढ़ाई के लिए आई थी। उसने अपनी पतली, नाजुक उंगलियों से माथे पर बिखरी काली जुल्फों को पीछे समेटा और चारों तरफ नजरें दौड़ाईं। उसकी छाती धड़कनों के मारे तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। तभी भीड़ को चीरते हुए उसकी सबसे पक्की सहेली तन्वी उसकी तरफ भागती हुई आई।

"अहाना! ओ माय गॉड, अहाना!" तन्वी ने चिल्लाते हुए सीधे आकर अहाना को अपनी बाहों में भींच लिया। तन्वी की इस कशिश भरी जकड़न से अहाना के कांपते बदन में थोड़ी जान आई।

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