
ड्रॉइंग रूम में बिखरी गेंदे के फूलों की महक और चाय की कड़क खुशबू के बीच काव्या जैसे काठ की पुतली बनकर खड़ी रह गई थी। सेंटर टेबल पर रखा वह चमचमाता हुआ ब्लैक बॉक्स किसी खूबसूरत तोहफे की तरह नहीं, बल्कि किसी जहरीले नाग के फन की तरह लग रहा था, जिस पर सोने की नक्काशीदार स्याही से 'AR' यानी अथर्व राठौड़ का नाम अंकित था।
"काव्या! अरे ओ काव्या, कहाँ खो गई तू?" सावित्री जी ने उसके हाथ को हल्के से झटकते हुए कहा। "मिश्रा जी तुझसे कुछ कह रहे हैं, जरा उनकी बात का जवाब तो दे!"





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