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अजनबी सख्स

पब के भीतर की हवा बेस की भारी थपकियों, महंगी शराब की महक और सिगरेट के धुएं से भारी थी। नियॉन नीली और सुर्ख लाल लाइटें हर चेहरे पर इस तरह तैर रही थीं कि कोई भी साफ नजर नहीं आ रहा था। वह काउंटर के कोने वाले स्टूल पर बैठी थी, अपनी उंगलियों से वाइन के ग्लास के स्टेम को लगातार घुमा रही थी। उसका दिल एक अजीब सी बेचैनी से भरा हुआ था। आज की रात वह सब कुछ भूल जाना चाहती थी। वह घुटन, वह पुराना रिश्ता जिसने उसे अंदर से तोड़ दिया था, और वह सन्नाटा जो उसे घर में काटने को दौड़ता था।

"एक और?" बारटेंडर ने उसकी खाली होती जा रही ग्लास की तरफ इशारा करते हुए पूछा।

"हाँ, प्लीज। थोड़ा स्ट्रॉन्ग," उसने अपनी भीगी हुई आवाज को सँभालते हुए कहा और अपनी बिखरी जुल्फों को कान के पीछे धकेला। उसकी आँखें नम थीं, लेकिन चेहरे पर एक थकी हुई जिद्द थी।

"अकेली लड़कियों को इतनी रात गए इतनी स्ट्रॉन्ग ड्रिंक नहीं लेनी चाहिए। खासकर तब, जब उनकी आँखें कोई बहुत गहरी बात छुपा रही हों।"

एक गहरी, भारी और बेहद मर्दाना आवाज ठीक उसके कान के पास गूंजी। वह चौंक कर घूमी। उसके ठीक बगल वाले स्टूल पर वह शख्स आकर बैठ चुका था। अंधेरे और चमकती लाइट्स के खेल में उसका पूरा चेहरा साफ नहीं दिख रहा था, लेकिन उसकी चौड़ी कद-काठी, कड़क कॉलर वाली ब्लैक शर्ट और उसकी आँखों की चमक साफ महसूस हो रही थी। उस अजनबी की आँखों में एक अजीब सा ठहराव था, और एक तीखा आकर्षण भी।

उसने अपनी नजरें घुमाईं और उपेक्षा भरे लहजे में कहा, "मुझे नहीं लगता कि मैंने आपसे कोई सलाह मांगी है, मिस्टर..."

"नाम में क्या रखा है? वैसे भी, इस शहर की इस धुंधली रात में हम दोनों ही अजनबी हैं," उसने अपनी ड्रिंक का घूंट लेते हुए कहा। उसके होंठों पर एक हल्की, रहस्यमयी मुस्कान थी। उसकी नजरें लड़की के चेहरे पर टिक गई थीं, जैसे वह उसके भीतर चल रहे तूफान को पढ़ रहा हो।

"मुझे अजनबियों से बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं है," उसने अपनी ग्लास उठाई, लेकिन उसके हाथ थोड़े कांप रहे थे।

"दिलचस्पी तो बातों से ही शुरू होती है," अजनबी ने थोड़ा और करीब खिसकते हुए कहा। उसकी सांसों की गर्मी अब लड़की के कंधों पर महसूस हो रही थी। "तुम्हारी आँखें कह रही हैं कि तुम यहाँ किसी को ढूंढने नहीं, बल्कि खुद को भूलने आई हो। क्या मैं सही हूँ?"

लड़की ने उसकी तरफ देखा। उस अजनबी की गहरी, काली आँखों में कुछ ऐसा था जो उसे अपनी तरफ खींच रहा था। वह मना करना चाहती थी, उठकर भाग जाना चाहती थी, लेकिन उसके पैर जैसे स्टूल से चिपक गए थे। उसने बिना कुछ बोले अपनी पूरी ड्रिंक एक ही बार में हलक से नीचे उतार ली।

नशा अब धीरे-धीरे उसके दिमाग पर हावी हो रहा था। क्लब का शोर अब उसे दूर किसी वादी के शोर जैसा लग रहा था, लेकिन इस अजनबी की हर एक हरकत, उसके कपड़ों की महक जो चंदन और कड़क तंबाकू का एक अजीब सा मिश्रण थी, उसके होश उड़ा रही थी।

"तुम्हें अब और नहीं पीना चाहिए," अजनबी ने धीरे से अपना बड़ा, गर्म हाथ आगे बढ़ाया और उसके हाथ से खाली ग्लास ले लिया। जब उसकी उंगलियां लड़की की ठंडी त्वचा से छुईं, तो जैसे दोनों के बीच एक करंट सा दौड़ा। लड़की ने झटके से अपना हाथ नहीं खींच पाया। उसकी उंगलियों की छुअन में एक अजीब सा हक़ था, एक ऐसी ताकत थी जिससे वह मना नहीं कर पा रही थी।

"तुम... तुम मुझे रोकने वाले कौन होते हो?" उसने लड़खड़ाती जुबान से कहा, उसकी पलकें भारी हो रही थीं।

"कोई नहीं। बस एक इंसान, जो तुम्हें इस हालत में अकेले इस भीड़ में नहीं छोड़ सकता," उसने सीधे उसकी आँखों में देखते हुए कहा। उसका चेहरा अब बेहद करीब था। उसकी तीखी नाक, घनी दाढ़ी और वे गहरी आँखें, जो इस वक्त सिर्फ और सिर्फ उसे देख रही थीं।

लड़की ने एक गहरी सांस ली। उसका सिर घूम रहा था। "मुझे घर जाना है... नहीं, मुझे कहीं नहीं जाना। मुझे बस इस दर्द से दूर जाना है।"

अजनबी के चेहरे पर एक गंभीर भाव उभरा। उसने लड़की के चेहरे पर आई एक लट को अपनी उंगलियों से धीरे से हटाया। उसका स्पर्श इतना कोमल था, फिर भी उसमें एक अजीब सी तड़प थी। "चलो मेरे साथ। मैं तुम्हें उस दर्द से दूर ले चलता हूँ। सिर्फ आज की रात के लिए।"

उसने अजनबी की आँखों में देखा। वहाँ कोई फरेब नहीं था, बस एक बेकाबू कर देने वाला आकर्षण था। उसने बिना कुछ सोचे, बिना उसका नाम जाने, अपनी रजामंदी में सिर हिला दिया। वह भूल गई कि वह कौन है, कहाँ से आई है। इस वक्त, इस धुंधली रात में, सिर्फ वह थी और वह अजनबी।

होटल के लक्ज़री सुइट का दरवाजा जैसे ही बंद हुआ, क्लब का सारा शोर एक झटके में गायब हो गया। कमरे में सिर्फ सन्नाटा था और डिम लाइट्स की हल्की पीली रोशनी। अजनबी ने उसे सहारा देकर अंदर लाया। जैसे ही उसने लड़की को छोड़ना चाहा, लड़की का पैर कालीन पर फिसल गया और वह सीधे अजनबी के चौड़े सीने से जा टकराई।

"संभलकर..." अजनबी की आवाज इस बार और गहरी और भारी थी। उसके दोनों मजबूत हाथ लड़की की पतली कमर पर कस गए थे।

लड़की की सांसें तेज चल रही थीं। उसका सीना अजनबी के मजबूत सीने के खिलाफ ऊपर-नीचे हो रहा था। उसने अपनी नजरें उठाईं। इस रोशनी में वह अजनबी और भी ज्यादा सम्मोहक लग रहा था। उसकी शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले थे, जहाँ से उसकी छाती की मजबूत मांसपेशियां नजर आ रही थीं।

"तुम... तुम बहुत अजीब हो," उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसके हाथ अनजाने में ही अजनबी के कंधों पर टिक गए थे।

"और तुम बहुत खूबसूरत हो... इतनी, कि इस वक्त खुद पर काबू रखना मेरे लिए भी मुश्किल हो रहा है," अजनबी ने सच कड़वाहट और शिद्दत के साथ कुबूल किया। उसकी आँखों में एक अजीब सा जूनून तैर रहा था, एक ऐसी भूख जो शायद वह खुद भी नहीं समझ पा रहा था।

"तो मत रखो काबू..." लड़की के मुंह से यह शब्द जैसे खुद-ब-खुद निकल गए। नशे और गिल्ट के बीच दबे उसके दिल ने इस वक्त सिर्फ और सिर्फ उस अजनबी के स्पर्श की मांग की।

अजनबी की आँखों में जैसे एक चिंगारी भड़क उठी। उसने लड़की की कमर पर अपनी पकड़ को और मजबूत किया, उसे अपनी तरफ और जोर से खींचा, जिससे दोनों के बीच की बची-खुची दूरी भी खत्म हो गई। "सोच लो। कल सुबह तुम इस रात को भूल नहीं पाओगी।"

"मैं भूलना भी नहीं चाहती," उसने अपनी आँखें बंद करते हुए कहा।

अजनबी ने और वक्त नहीं गंवाया। उसने अपना एक हाथ लड़की की गर्दन के पीछे रखा, उसकी उंगलियों को उसके रेशमी बालों में फंसाया और उसका चेहरा थोड़ा ऊपर उठाया। अगले ही पल, उसके भारी, गर्म होंठ लड़की के कांपते हुए होंठों पर टिक गए।

अमम्मम...

यह कोई साधारण किस नहीं था। इसमें एक अजीब सी आक्रामकता थी, एक ऐसा जूनून था जो लड़की ने पहले कभी महसूस नहीं किया था। अजनबी के होंठों का स्वाद तीखा और नशीला था। लड़की की आँखें चौंक कर खुलीं, लेकिन अगले ही पल उसने खुद को पूरी तरह से उस स्पर्श के हवाले कर दिया। उसके हाथ अजनबी के बालों में चले गए, और वह उसके और करीब आने की कोशिश करने लगी।

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