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तुम मेरी लत बन गई हो

रात के दो बज रहे थे। शहर की सड़कें सुनसान थीं, सिवाय रुद्र की कार के इंजन की गूँज के। रुद्र पहले सिया की hostel गया था। उसने सिया के नाम लेकर वहाँ चीखकर पुकारा तो hostel की warden घबराकर आई और उसे बताया कि सिया hostel आई ही नहीं है। रुद्र अपने गाड़ी लेकर वहाँ से चला गया। उसकी आँखों में नींद नहीं, बल्कि एक अजीब सा लाल घेरा था। शराब का नशा उसके खून में दौड़ रहा था, लेकिन उसका दिमाग सिर्फ एक ही पते की ओर इशारा कर रहा था।

उसने स्टयरिंग व्हील को इतनी जोर से जकड़ा हुआ था कि उसके पोर सफेद पड़ गए थे। "तीन दिन... तीन दिन तुमने मुझे उस नरक में छोड़ दिया सिया। अब जवाब देने का वक्त आ गया है।" उसने अचानक ब्रेक मारा। गाड़ी एक पुराने, मध्यम वर्गीय इलाके के एक छोटे से घर के सामने रुकी। यह वही घर था जिसे सिया ने अपने माता-पिता की यादों के तौर पर सहेज कर रखा था।

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