
रुद्र के केबिन में हवा जैसे जम गई थी। सिया के जाने के बाद भी रुद्र वहीं खड़ा था, उसके हाथ से टपकता खून अब मेज पर सूखने लगा था। उसने अपनी मुट्ठी को और ज़ोर से भींचा। दर्द? उसे दर्द महसूस ही नहीं हो रहा था। उसे बस आरव की वह हंसी याद आ रही थी जो सिया के साथ गूंज रही थी।





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