
सिया के केबिन से बाहर निकलते ही रुद्र जैसे किसी गहरे सदमे में आ गया था। दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ उसके कानों में किसी धमाके की तरह गूंजी। उसने अपनी महंगी लेदर चेयर के हत्थों को इतनी ज़ोर से पकड़ा कि उसके हाथों की नसें उभर आईं। केबिन में लगे एयरकंडीशनर की आवाज़ अब उसे शोर लग रही थी।
उसने मेज पर रखे पानी के गिलास को उठाया और एक ही सांस में खाली कर दिया। "द ब्लू ओक... रात 8 बजे..." उसने बुदबुदाया। उसकी आंखों में एक अजीब सा गुस्सा था, पर उस गुस्से के पीछे एक कसमसाहट भी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इस 21 साल की लड़की को 'बच्ची' कहना बंद क्यों नहीं कर पा रहा, जबकि वह उसके साम्राज्य की नींव हिला रही थी।





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