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जिद् में अपने पापा पर गई हूँ

रुद्र सिंह शेखावत की सुबह वैसी ही थी जैसी हर रोज़ होती थी सटीक और अनुशासित। लेकिन आज उसके मन में एक अजीब सी हलचल थी। खन्ना को दिया गया आदेश उसके दिमाग में घूम रहा था। 'उसे सबसे मुश्किल काम देना।' उसे लगा था कि कल की डांट के बाद सिया शायद आएगी ही नहीं।

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